पूत ध्येय का दीप प्रलय की झंझा में निर्भय जलता है॥

अन्तत में विश्वास चरण में
तूफानों की गति ले पथ पर
प्रलय -पवन हो अविरल निर्भय
अपनी अटपट पथ पर पग-पग
पंथी अविचल ही बढ़ता है॥१॥

तम की छाती चीर बिखर
पड़ती नभ में दिनकर की आभा
शैल-शिखर पर चढ़ता बढ़ता
नष्ट -भ्रष्ट कर पथ की बाधा
अपने पथ को आप बनाता
युग-युग से निर्झर बहता है॥२॥

राष्ट्र-धर्म की ज्वाला में तिल-
तिल जलने की अमर चाह ले
विमल साधना में रत साधक
डिगा सकेगा कौन राह से
नगपति सा वह अटल तपस्वी
सुख-दुःख में अविचल रहता है॥३॥

pūta dhyeya kā dīpa pralaya kī jhaṁjhā meṁ nirbhaya jalatā hai ||

antata meṁ viśvāsa caraṇa meṁ
tūphānoṁ kī gati le patha para
pralaya -pavana ho avirala nirbhaya
apanī aṭapaṭa patha para paga-paga
paṁthī avicala hī baṛhatā hai ||1||

tama kī chātī cīra bikhara
paṛatī nabha meṁ dinakara kī ābhā
śaila-śikhara para caṛhatā baṛhatā
naṣṭa -bhraṣṭa kara patha kī bādhā
apane patha ko āpa banātā
yuga-yuga se nirjhara bahatā hai ||2||

rāṣṭra-dharma kī jvālā meṁ tila-
tila jalane kī amara cāha le
vimala sādhanā meṁ rata sādhaka
ḍigā sakegā kauna rāha se
nagapati sā vaha aṭala tapasvī
sukha-duaḥkha meṁ avicala rahatā hai ||3||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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