कह नहीं सकता
समस्याएँ बढ़ी हैं,
और या कुछ
घटा है सम्मान।

बढ़ रही हैं नित निरंतर,
सभी सुविधाएं,
कमी कुछ भी नहीं है,
प्रचुर है धन धान।

और दिनचर्या वही है,
संतुलित पर हो रहा है
रात्रि का भोजन,
प्रात का जलपान।

घटा है उल्लास,
मन का हास,
कुछ बाकी नहीं
आधे अधूरे काम।

और वय कुछ शेष,
बैरागी हृदय चुपचाप तकता,
अनमना, कुछ क्षीण होती
जिंदगी की शाम।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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