आ गया आ गया आ गया संक्रान्ति का संदेश पावन
संक्रमण का पर्व यह जनमन सुहावन॥ध्रु॥

त्यागकर गत पंथ दिनकर बढ़ चला नूतन डगर
नियति मधुऋतु वरण करनी आज नव श्रंगार कर
सुरभि बिखरा गगन करता स्वहित गायन
संक्रमण का पर्व ॥१॥

स्नेह समता बन्धता का भाव जन जन में जगा।
प्रान्त भाषा पंथ की गत कालिमा को दे भगा॥
तृप्त सेवा भाव से कर दे सभी का ह्रदय पावन।
संक्रमण का पर्व ॥२॥

ज्ञान और विज्ञान के ऐश्वर्य का सूरज उगायें।
स्वद शोणिय को बहा समृध्दि का सरसिज खिलाएँ॥
मातृ भू का हम करें समवेत स्वर से आज गायन।
संक्रमण का पर्व ॥३॥

इस सनातन राष्ट्र का फिर विश्व में यशकीर्ति छाये।
राष्ट्र का जयकेतु भगवा विश्व में फिर लहलहायें॥
चूर कर दो गर्व अरि का दृष्टि जो फेरे अपावन।
संक्रमण का पर्व ॥४॥

ā gayā ā gayā ā gayā saṁkrānti kā saṁdeśa pāvana
saṁkramaṇa kā parva yaha janamana suhāvana ||dhru||

tyāgakara gata paṁtha dinakara baṛha calā nūtana ḍagara
niyati madhuṛtu varaṇa karanī āja nava śraṁgāra kara
surabhi bikharā gagana karatā svahita gāyana
saṁkramaṇa kā parva ||1||

sneha samatā bandhatā kā bhāva jana jana meṁ jagā |
prānta bhāṣā paṁtha kī gata kālimā ko de bhagā ||
tṛpta sevā bhāva se kara de sabhī kā hradaya pāvana |
saṁkramaṇa kā parva ||2||

jñāna aura vijñāna ke aiśvarya kā sūraja ugāyeṁ |
svaeda śoṇiya ko bahā samṛdhdi kā sarasija khilāe ||
mātṛ bhū kā hama kareṁ samaveta svara se āja gāyana |
saṁkramaṇa kā parva ||3||

isa sanātana rāṣṭra kā phira viśva meṁ yaśakīrti chāye |
rāṣṭra kā jayaketu bhagavā viśva meṁ phira lahalahāyeṁ ||
cūra kara do garva ari kā dṛṣṭi jo phere apāvana |
saṁkramaṇa kā parva ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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