अमूर्त मूर्त मूर्तिमंत तुजसमान होऊ दे
येत शरण तव पदांसि देशकार्यि विरमु दे॥

उमलतिल ह्या कळया हळूहळूंचि पाकळ्या
तत् सुगंध तुजसमान सर्वदूर पसरु दे॥१॥

पुष्पफले नको आम्हासि अर्पु दे तुझ्या पदांसि
स्वार्थाचे होमहवन तुजपुढेचि होउ दे॥२॥

आम्हासि तूच ध्येय देव सेवु धरुनि भक्तिभाव
पूजने तुझ्या आम्हास देवरुप होउ दे॥३॥

अससि भव्यदिव्य दीप तेज तुझे असे अमूप
ज्योत तीच आमुच्याही ह्रदयांतरि उजळु दे॥४॥

करुनिया तुझ्यासमान होउ देच वर्धमान
देश धर्म संस्कृतिचे संरक्षणचि होउ दे॥५॥

amūrta mūrta mūrtimaṁta tujasamāna hoū de
yeta śaraṇa tava padāṁsi deśakāryi viramu de ||

umalatila hyā kaḻayā haḻūhaḻūṁci pākaḻyā
tat sugaṁdha tujasamāna sarvadūra pasaru de ||1||

puṣpaphale nako āmhāsi arpu de tujhyā padāṁsi
svārthāce homahavana tujapuḍheci hou de ||2||

āmhāsi tūca dhyeya deva sevu dharuni bhaktibhāva
pūjane tujhyā āmhāsa devarupa hou de ||3||

asasi bhavyadivya dīpa teja tujhe ase amūpa
jyota tīca āmucyāhī hradayāṁtari ujaḻu de ||4||

karuniyā tujhyāsamāna hou deca vardhamāna
deśa dharma saṁskṛtice saṁrakṣaṇaci hou de ||5||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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