ANTARMAN KE BHAV SANJOKAR || अंतर्मन के भाव संजोकर राष्ट्रदेव का ध्यान करें

अंतर्मन के भाव संजोकर , राष्ट्रदेव का ध्यान करें।
अपना तन-मन अपना जीवन , इस वेदी पर दान करें॥

जिसकी रक्षा करने को ही ,देवों के अवतार हुए।
जिसके पावन कर्म देवता , संस्कृति के आधार हुए।

पूत देववाणी कहलायी जिनसे यह संस्कृति भाषा

देव धरा पर कभी न पनपी दुष्ट दानवों की आशा

इस राष्ट्र का निज पौरुष से विक्रम से निर्माण करें। । १

अपना तन-मन अपना जीवन , इस वेदी पर दान करें॥

जिसकी पूजा की वीरों ने , सदियों अपने प्राणों से।
माँ बहिनों ने शिशु बालों ने , निज अनुपम बलिदानों से।

जिसकी जय जय कहते कहते लाखों ने फांसी पायी

जिसके आँगन में स्वतंत्रता देवी ने लोरी गायी
इसको अजर अमर करने को , फिर सशक्त बलवान बनें। । २

अपना तन-मन अपना जीवन , इस वेदी पर दान करें॥

सबसे उर्वर इसकी धरती ,सबसे शुचि इसका पानी।
अन्नपूर्णा लक्ष्मी है यह , सिंह वाहिनी मर्दानी।
विविध अन्न फल फूल यहाँ पर ,उगते आये सदा अपार।
स्वर्ण रजत हीर मोती की , यह वसुधा अक्षय आगार।
अपने श्रम अपने उद्यम से ,फिर इसको धनवान करे। । ३

अपना तन-मन अपना जीवन , इस वेदी पर दान करें॥

ऊँच-नीच के भेद भुला , भाई -भाई सब एक रहें।
अनुशासन से ह्रदय सींचकर ,पौरुष के अतिरेक बनें।
राष्ट्र हेतु सर्वस्व समर्पण , को जनमन तैयार रहे।
ह्रदय-ह्रदय से राष्ट्र भक्ति की ,बहती अविरल धार रहे।
संगठनों से सारे जग मे , फिर इसको छविमान करे। । ४

अपना तन-मन अपना जीवन , इस वेदी पर दान करें॥

अंतर्मन के भाव संजोकर , राष्ट्रदेव का ध्यान करें।
अपना तन-मन अपना जीवन , इस वेदी पर दान करें॥

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