अविरल चलती रहे साधना॥ ध्रु०॥

पूत ध्येय पावन है साधन
ध्येय इष्ट अपना मन भावन
श्रम जल से प्रिय इष्ट देव की
प्रतिदिन होती रहे अर्चना॥१॥

प्रति पल पग बढ़ता ही जाये
लक्ष्य निकटतर आता जाये
साधक होकर जियें जगत में
जीवन ही बन जाये साधना॥२॥

अमित स्नेहमय ह्रदय -दीप हो
हंस -हंस जल जग -तम हरता हो
परहित ज्योतिर्मय जीवन दो
प्रभु से केवल यही याचना॥३॥

करते जायें नव युग सर्जन
जन -जन में भर दें नवजीवन
धरती को नन्दन बन कर दे
पूरी होगी तभी साधना॥४॥

avirala calatī rahe sādhanā || dhru0 ||

pūta dhyeya pāvana hai sādhana
dhyeya iṣṭa apanā mana bhāvana
śrama jala se priya iṣṭa deva kī
pratidina hotī rahe arcanā ||1||

prati pala paga baṛhatā hī jāye
lakṣya nikaṭatara ātā jāye
sādhaka hokara jiyeṁ jagata meṁ
jīvana hī bana jāye sādhanā ||2||

amita snehamaya hradaya -dīpa ho
haṁsa -haṁsa jala jaga -tama haratā ho
parahita jyotirmaya jīvana do
prabhu se kevala yahī yācanā ||3||

karate jāyeṁ nava yuga sarjana
jana -jana meṁ bhara deṁ navajīvana
dharatī ko nandana bana kara de
pūrī hogī tabhī sādhanā ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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