बाधाओं से भय न हमें
हम तुफानों में चलते हैं॥

पथ चाहे घोर अंधेरा हो
दुःख द्वंद्वों ने जब घेरा हो
हो महा वृष्टि भीषण गर्जन
करता हो महाकाल नर्तन
पर कब किससे डरने वाले
हम संघर्षो में पलते हैं
हम तूफानों में चलते हैं॥१॥

अत्याचारों की आँधी भी
जिसको निःशेष न कर पायी
जो सत्य चिन्तन अक्षय है
हम उस संस्कृति के अनुयायी
विपदाओं के कंटक वन में
हम अग्नि-शिखा बन जलते हैं॥२॥

bādhāoṁ se bhaya na hameṁ
hama tuphānoṁ meṁ calate haiṁ ||

patha cāhe ghora aṁdherā ho
duaḥkha dvaṁdvoṁ ne jaba gherā ho
ho mahā vṛṣṭi bhīṣaṇa garjana
karatā ho mahākāla nartana
para kaba kisase ḍarane vāle
hama saṁgharṣo meṁ palate haiṁ
hama tūphānoṁ meṁ calate haiṁ ||1||

atyācāroṁ kī ādhī bhī
jisako niaḥśeṣa na kara pāyī
jo satya cintana akṣaya hai
hama usa saṁskṛti ke anuyāyī
vipadāoṁ ke kaṁṭaka vana meṁ
hama agni-śikhā bana jalate haiṁ ||2||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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