बढ़ रहे हैं हम निरन्तर चिर विजय की कामना ले।
बढ़ रहे हैं॥

पुष्प-शय्या त्याग दी कर्तव्य-कंकड़ धार कर
कूद समर में पड़े हम धैर्य-धनु टंकार कर
दुष्ट-दानवता दलनहित काल का अवतार लेकर
अग्नि-पथ पर बढ़ रहे हम रुद्र सी हुँकार भरकर
प्रलयकारी हम प्रभंजन अमरता आराधना ले॥१॥

हैं जगाई सुखद हमने सुप्त-स्मृतियाँ चिर-पुरातन
हैं संजाई दुखद स्मृतियाँ चिर-पुरातन नित्य-नूतन
विगत वैभन के प्रदर्शन दीनता के कटु निदर्शन
जय-पराजय प्रगति-अवनति सुखों-दुखों का देख नर्तन
कर चुके प्रण विगत वैभव -स्थापना की साधना ले॥२॥

हम चले जन-मन-कलुष का नेह से संहार करने
शुध्द संस्कृति -स्त्रोत की अवरुध्दता का अन्त करने
सृजन वीणा के सुकोमल तार की झंकार करने
बन्धुओं के दग्ध उर में शांति का संचार करने
विकट पथ पर चल पड़े ध्रुव ध्येय की संभावना ले॥३॥

कर्म -पथ पर इस प्रखरतर शूल भी हैं फूल भी हैं
अल्प-जन अनुकूल हैं पर सैकड़ों प्रतिकूल भी हैं
तालियों की टूट हैं पर गालियाँ भरपूर इस पर
संकटों के शैल शत-शत मोह-भ्रम के मूल भी हैं
किन्तु सुख-दुख में सदा ही एक सी अभिनन्दना लें।४॥

प्रबल सरिता स्रोत को अवरुध्द कब किसने किया हैं
उत्ताल वरिधि वीचियों को बाँध कब किसने दिया है
प्रस्फुटित रवि-रश्मियाँ कब छिप सकीं वारिद वनों में
सफल साधक योगियों को मोह कब किसने लिया है
हम सजग संभ्रम विपद की मोह की अवमानन ले॥५॥

हम सहस्रों शीश दृग पग और ह्रद् भुज् दण्डधारी
किन्तु जन-जन में जगी है भावना एकात्मकारी
शान्त हिमनग -श्रृंग से हिं ज्वाल अंतर की जगाये
प्रलयकारी है अहो पर साथ ही नव -सृजनकारी
अडिग अविचल बन पुजारी मातृ-उर की वेदना ले॥६॥

baṛha rahe haiṁ hama nirantara cira vijaya kī kāmanā le |
baṛha rahe haiṁ ||

puṣpa-śayyā tyāga dī kartavya-kaṁkaṛa dhāra kara
kūda samara meṁ paṛe hama dhairya-dhanu ṭaṁkāra kara
duṣṭa-dānavatā dalanahita kāla kā avatāra lekara
agni-patha para baṛha rahe hama rudra sī hukāra bharakara
pralayakārī hama prabhaṁjana amaratā ārādhanā le ||1||

haiṁ jagāī sukhada hamane supta-smṛtiyā cira-purātana
haiṁ saṁjāī dukhada smṛtiyā cira-purātana nitya-nūtana
vigata vaibhana ke pradarśana dīnatā ke kaṭu nidarśana
jaya-parājaya pragati-avanati sukhoṁ-dukhoṁ kā dekha nartana
kara cuke praṇa vigata vaibhava -sthāpanā kī sādhanā le ||2||

hama cale jana-mana-kaluṣa kā neha se saṁhāra karane
śudhda saṁskṛuti -strota kī avarudhdatā kā anta karane
sṛjana vīṇā ke sukomala tāra kī jhaṁkāra karane
bandhuoṁ ke dagdha uara meṁ śāṁti kā saṁcāra karane
vikaṭa patha para cala paṛe dhruva dhyeya kī saṁbhāvanā le ||3||

karma -patha para isa prakharatara śūla bhī haiṁ phūla bhī haiṁ
alpa-jana anukūla haiṁ para saikaṛoṁ pratikūla bhī haiṁ
tāliyoṁ kī ṭūṭa haiṁ para gāliyā bharapūra isa para
saṁkaṭoṁ ke śaila śata-śata moha-bhrama ke mūla bhī haiṁ
kintu sukha-dukha meṁ sadā hī eka sī abhinandanā leṁ |4||

prabala saritā srota ko avarudhda kaba kisane kiyā haiṁ
uttāla varidhi vīciyoṁ ko bādha kaba kisane diyā hai
prasphuṭita ravi-raśmiyā kaba chipa sakīṁ vārida vanoṁ meṁ
saphala sādhaka yogiyoṁ ko moha kaba kisane liyā hai
hama sajaga saṁbhrama vipada kī moha kī avamānana le ||5||

hama sahasroṁ śīśa dṛga paga aura hrad bhuj daṇḍadhārī
kintu jana-jana meṁ jagī hai bhāvanā ekātmakārī
śānta himanaga -śrṛṁga se hiṁ jvāla aṁtara kī jagāye
pralayakārī hai aho para sātha hī nava -sṛjanakārī
aḍiga avicala bana pujārī mātṛ-ura kī vedanā le ||6||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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