हे निखिल ब्रह्माण्ड नायक एक यह वरदान दो।
मातृ भू के हित अखण्डित कर्म -निष्ठा ज्ञान दो॥

देव- देवी सब समाये –
पुण्य रज आराध्य है
सिध्द साधक साधना है।
जन्म -जन्मांतर निरंतर भक्ति -अमृत-पान दो॥ हे निखिल ॥१॥

मोक्ष की इच्छा नहीं है
स्वर्ग केवल धूल है
छोड़कर अंचल जननि का
छानना जग भूल है।
नित्य शक्ति-रुपिणी माँ प्राण में संधान दो॥हे निखिल ॥२॥

व्यर्थ जग का राज्य माँ की –
छत्र छाया छोड़कर
तुच्छ धनपति का खजाना
देश से मुँह मोड़कर।
मृत्यु-जीवन में सदा माँ गोद में ही स्थान दो॥ हे निखिल॥३॥

he nikhila brahmāṇḍa nāyaka eka yaha varadāna do |
mātṛ bhū ke hita akhaṇḍita karma -niṣṭhā jñāna do ||

deva- devī saba samāye –
puṇya raja ārādhya hai
sidhda sādhaka sādhanā hai |
janma -janmāṁtara niraṁtara bhakti -amṛta-pāna do || he nikhila ||1||

mokṣa kī icchā nahīṁ hai
svarga kevala dhūla hai
choṛakara aṁcala janani kā
chānanā jaga bhūla hai |
nitya śakti-rupiṇī mā prāṇa meṁ saṁdhāna do |e nikhila ||2||

vyartha jaga kā rājya mā kī –
chatra chāyā choṛakara
tuccha dhanapati kā khajānā
deśa se muha moṛakara |
mṛtyu-jīvana meṁ sadā mā goda meṁ hī sthāna do || he nikhila ||3||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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