जाग उठे हम हिंदू फिर से, विजय ध्वजा फहराने ।
अंगड़ाई ले चले पुत्र हैं, माँ के कष्ट मिटाने ॥धृ॥

जिनके पुरखे महा यशस्वी, वे फिर क्यों घबराएँ ।
जिनके सुत अतुलित बलशाली, शौर्य गगन पर छायें |
लेकर शस्त्र शास्त्र को कर में, शत्रु हृदय दहलाने ॥१॥

हम अगस्त्य बन महासिंधु को, अंजुलि में पी जाएँ ।
तीन डगों सृष्टि नाप ले, कालकूट पी जाएँ ।
पृथ्वी के हम अमर पुत्र हैं, जग को चले जगाने ॥२॥

हिन्दु भाव को जब जब भूले, आई विपद महान ।
भाई छूटे धरती खोई, मिट गये धर्म संस्थान ।
भूलें छोड़े और गूँजादें, जय से भरे तराने ॥३॥

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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