जय -जय भारतवर्ष महान्।
जय-जय जय- जय हिन्दुस्थान॥ध्रु०॥

यह ऋषियों की जन्मभूमि है
जन्मभूमि यह कर्मभूमि है।
यही शान्ति का अग्रदूत है
नंव रत्नों की खान॥१॥

इसकी अन्तस में गंगा जल
इसकी साँसों में मलयानिल।
लेकिन इसके तेवर में हैं
छिपे प्रबल तूफान॥२॥

मरण यहा। णुत्सव कहलाता
शिव का यहाँ शक्ति से नाता।
यहाँ शहीदों ने धरती का
किया रक्त से स्नान॥३॥

jaya -jaya bhāratavarṣa mahān |
jaya-jaya jaya- jaya hindusthāna ||dhru0||

yaha ṛṣiyoṁ kī janmabhūmi hai
janmabhūmi yaha karmabhūmi hai |
yahī śānti kā agradūta hai
naṁva ratnoṁ kī khāna ||1||

isakī antasa meṁ gaṁgā jala
isakī sāsoṁ meṁ malayānila |
lekina isake tevara meṁ haiṁ
chipe prabala tūphāna ||2||

maraṇa yahā| ṇutsava kahalātā
śiva kā yahā śakti se nātā |
yahā śahīdoṁ ne dharatī kā
kiyā rakta se snāna ||3||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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