ज्योतिर्मय कर दो
जग का व्यापक अन्धकार हर-
निज प्रकाश भर दो
ज्योतिर्मय कर दो

चाहे जितने शूल अड़े हों
चाहे जितने फूल पड़े हों
केवल इस पग को बढ़ने के-
हित निर्भय कर दो
ज्योतिर्मय कर दो

मोह नहीं है तारा गण से
या प्राणों के दीप सृजन से
केवल कृपा किरण से सूना-
अन्तराल भर दो
ज्योतिर्मय कर दो

लक्ष्य न नयनों से ओझल हो
एक तुम्हारा ही सम्बल हो
आलोकित कर मानस निज में
मुझको लय कर दो
ज्योतिर्मय कर दो

jyotirmaya kara do
jaga kā vyāpaka andhakāra hara-
nija prakāśa bhara do
jyotirmaya kara do

cāhe jitane śūla aṛe hoṁ
cāhe jitane phūla paṛe hoṁ
kevala isa paga ko baṛhane ke-
hita nirbhaya kara do
jyotirmaya kara do

moha nahīṁ hai tārā gaṇa se
yā prāṇoṁ ke dīpa sṛjana se
kevala kṛpā kiraṇa se sūnā-
antarāla bhara do
jyotirmaya kara do

lakṣya na nayanoṁ se ojhala ho
eka tumhārā hī sambala ho
ālokita kara mānasa nija meṁ
mujhako laya kara do
jyotirmaya kara do

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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