क्रांति पग बढ़ाये चल
मार्ग है प्रशस्त युवा क्रान्ति पग बढाए चल
क्रांति पग बढाए चल क्रांति पग बढाए चल

हो तुफानी घन घटा अन्धकारमय निशा
दामिनी क्षणिक चमक भ्रमित कर रही दिशा
फिर भी तरुण रक्त से दीप तू जलाये चल
दीप तू जलाये चल क्रांति पग बढाये चल॥१॥

समर भू पुकार कर वीर का श्रुंगार कर
क्रांति की कगार पर नित्य नव विचार कर
शंख नाद भेरी से गगन तू गुंजाए चल
गगन तू गुंजाए चल क्रांति पग बढाये चल॥२॥

शत्रु दग्ध भूमि हो भेद से भरी हुई
जन्मभूमि ये तेरी रक्त से सनी हुई।
स्वर्धम स्नेह त्याग से भेद तू मिटाये चल।
भेद तू मिटाये चल क्रांति पग बढ़ाये चल॥३॥

रुढ़ियों का बांध भी तोड़ना तुझे ही है।
बुध्दि और विवेक से जोड़ना तुझे ही है।
भोगवादि प्रवृत्ति को देश से मिटाए चल।
देश से मिटाए चल क्रांति पग बढ़ाए चल॥४॥

krāṁti paga baṛhāye cala
mārga hai praśasta yuvā krānti paga baḍhāe cala
krāṁti paga baḍhāe cala krāṁti paga baḍhāe cala

ho tuphānī ghana ghaṭā andhakāramaya niśā
dāminī kṣaṇika camaka bhramita kara rahī diśā
phira bhī taruṇa rakta se dīpa tū jalāye cala
dīpa tū jalāye cala krāṁti paga baḍhāye cala ||1||

samara bhū pukāra kara vīra kā śruṁgāra kara
krāṁti kī kagāra para nitya nava vicāra kara
śaṁkha nāda bherī se gagana tū guṁjāe cala
gagana tū guṁjāe cala krāṁtia paga baḍhāye cala ||2||

śatru dagdha bhūmi ho bheda se bharī huī
janmabhūmi ye terī rakta se sanī huī |
svardhama sneha tyāga se bheda tū miṭāye cala |
bheda tū miṭāye cala krāṁti paga baṛhāye cala ||3||

ruṛhiyoṁ kā bāṁdha bhī toṛanā tujhe hī hai |
budhdi aura viveka se joṛanā tujhe hī hai |
bhogavādi pravṛtti ko deśa se miṭāe cala |
deśa se miṭāe cala krāṁti paga baṛhāe cala ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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