सावन के मेले में मैं इस बात जाउंगी
डुबकी लगा के भोले हरिद्वार नेहलाऊगी
ओ भोले जी न करना तुम इनकार

अब यो डमरू वाले हम को ऐसे न तरसाओ
वादा किया पिछले सावन वाधा तुम निभाओ
गंगा जी में डुबकी भोले जाके लगाऊ गी
ओ भोले जी न करना तुम इनकार

ना घोटू मैं भांग चाहे जितना जोर लगाना लेना,
पड़ गए छाले हाथो में अब मिक्सी मूल मंगा लेना
तीन लोक के स्वामी सुन ले पीहर जाऊगी
ओ भोले जी न करना तुम इनकार

मान गया इब बात गोरा अपने पीहर मत जावे
बिन तेरे मेरा जी न लागे जो रे गोरा मत आवे
करदे माफ़ तू मने भोले अब न सताऊ गी
ओ भोले जी न करना तुम इनकार

,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply