प्रार्थना के स्वर हमारे प्राण की झंकार जननी
समरसता में मिले हैं जन ह्रदय के तार जननी॥ध्रु॥

हिंदुकुश योगी शिला मिल ब्रह्मानंद जा सिंधु से
जुट रहे हैं संगठन की भूमि के आधार जननी॥१॥

दर्पमद में झूमता आत्महन्ता विश्व है
शांति का प्यासा मनुज है शक्ति से लाचार जननी॥२॥

जानते हैं सब ह्रदय में निर्बलों की शक्ति तुम
शीघ्र चरणों में गिरेगा नम्र हो संसार जननी॥३॥

संगठन के हम पथित हैं वीरकर्मी पुत्र माँ
नित्य चढ़ता ही रहे माँ साधना का ज्वार जननी॥४॥

prārthanā ke svara hamāre prāṇa kī jhaṁkāra jananī
samarasatā meṁ mile haiṁ jana hradaya ke tāra jananī ||dhru||

hiṁdukuśa yogī śilā mila brahmānaṁda jā siṁdhu se
juṭa rahe haiṁ saṁgaṭhana kī bhūmi ke ādhāra jananī ||1||

darpamada meṁ jhūmatā ātmahantā viśva hai
śāṁti kā pyāsā manuja hai śakti se lācāra jananī ||2||

jānate haiṁ saba hradaya meṁ nirbaloṁ kī śakti tuma
śīghra caraṇoṁ meṁ giregā namra ho saṁsāra jananī||3||

saṁgaṭhana ke hama pathita haiṁ vīrakarmī putra mā
nitya caṛhatā hī rahe mā sādhanā kā jvāra jananī||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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