पूज्य मां की अर्चना का , एक छोटा उपकरण हूं।

उच्च है वह शिखर देखो , मैं नहीं वह स्थान लूंगा।

और चित्रित भीती का है , मैं नहीं शोभा बनूंगा।

पूज्य है यह मातृमंदिर ,नींव का मैं एक कण हूं।

पूज्य मां की अर्चना का ,एक छोटा उपकरण हूं। ।

मुकुट मां का जगमगाता , मै नहीं सोना बनूंगा

जगमगाते रत्न देखो , मैं नहीं हीरा बनूंगा।

पूज्य मां की चरण रज का ,एक छोटा धूलकण हूं।

पूज्य मां की अर्चना का , एक छोटा उपकरण हूं। ।

आरती भी हो रही है , गीत बन कर क्या करूंगा।

पुष्पमाला चढ़ रही है , फूल बन कर क्या करूंगा।

माली का एक तंतु , गीत का मैं एक स्वर हूं।

पूज्य मां की अर्चना का , एक छोटा उपकरण हूं। ।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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