पठत संस्कृतम्, वदत संस्कृतम्
लसतु संस्कृतं चिरं गृहे गृहे च पुनरपि ॥ पठत ॥

ज्ञानवैभवं वेदवाङ्मयं
लसति यत्र भवभयापहारि मुनिभिरार्जितम् ।
कीर्तिरार्जिता यस्य प्रणयनात्
व्यास-भास-कालिदास-बाण-मुख्यकविभि: ॥१॥

स्थानमूर्जितं यस्य मन्वते
वाग्विचिन्तका हि वाक्षु यस्य वीक्ष्य मधुरताम् ।
यद्विना जना नैव जानते
भारतीयसंस्कृतिं सनातनाभिधां वराम् ॥२॥

जयतु संस्कृतम्, संस्कृतिस्तथा
संस्कृतस्य संस्कृतेश्च प्रणयनाच्च मनुकुलम् ।
जयतु संस्कृतम्, जयतु मनुकुलम्
जयतु जयतु संस्कृतम्, जयतु जयतु मनुकुलम् ॥३॥

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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