यह देश मेरा धरा मेरी गगन मेरा।
उसके लिये बलिदान हो प्रत्येक कण मेरा॥

इस भूमी पर मस्तक उठाये चल रहा हूँ मैं
शस्य श्यामल भूमी को शत-शत नमन मेरा॥
यह देश मेरा ॥

हर साँस में मेरी सुरभि किसने बसा दी
इस धूली को हैं भेंट तन-मन- और धन मेरा॥
यह देश मेरा ॥

मैं जागता जिस पर उषा की चुमकर किरणें
हो उस धरा की गोद में अन्तिम शयन मेरा॥
यह देश मेरा ॥

yaha deśa merā dharā merī gagana merā |
usake liye balidāna ho pratyeka kaṇa merā ||

isa bhūmī para mastaka uṭhāye cala rahā hū maiṁ
śasya śyāmala bhūmī ko śata-śata namana merā ||
yaha deśa merā ||

hara sāsa meṁ merī surabhi kisane basā dī
isa dhūlī ko haiṁ bheṁṭa tana-mana- aura dhana merā ||
yaha deśa merā ||

maiṁ jāgatā jisa para uṣā kī cumakara kiraṇeṁ
ho usa dharā kī goda meṁ antima śayana merā ||
yaha deśa merā ||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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