ये शहीदों की जय हिंद बोली

ऐसी वैसी ये बोली नहीं है

इनके माथे पे खून का है टीका

देखो देखो ये रोली नहीं है। ।२

सर कटाऊं जवानो को लेकर चल पड़ें है हमीरा के आगे

हम है संतान राणा शिवा की , कायरों की ये टोली नहीं है।

चल दिया जब जवां हँसते हँसते , माँ की ममता तड़प करके बोली।

आओ सो जाओ लाल मेरी गौद में , अब तेरे पास गोली नहीं है।

अब विदा जाने वाले शहीदों , खून की सुर्ख पगड़ी पहनकर ,

खून की आज बौछार देखो , आज रंगो की होली नहीं है।

संघ पर आँख दिखलाने वाले , भस्म हो जाएंगे सारे दुश्मन ,

ये भला है कि अब तक हमने , तीसरी आँख नहीं खोले है।

ये शहीदों की जय हिंद बोली

ऐसी वैसी ये बोली नहीं है

इनके माथे पे खून का है टीका

देखो देखो ये रोली नहीं है। ।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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