कहा जाता है, “डॉक्टर भगवान के रूप होते है” और यह सच भी है, क्योंकी धरती पर हमें जीवन देने वाले सिर्फ डॉक्टर ही है। कोरोनाकाल में जहां हम सभी अपने घरों में रह रहे है, वहीं डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए अपने जान की बाजी लगाए बैठे है। साथ ही समाजसेवी व्यक्ति भी ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने का हर संभव प्रयास कर रहे है। डॉक्टर और समाजसेवियों के अलावा पुलिस वाले भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहें हैं। कभी सड़कों पर लोगों में जागरूकता फैला कर तो कभी लोगों के घरों तक खाद्य सामग्री पहुंचा कर। एक ऐसी ही महिला IAS अधिकारी है, डॉ. आकांक्षा भास्कर जो लोगों की मदद करने के लिए IAS अधिकारी से पुनः डॉक्टर बन गई।

IAS अधिकारी डॉ. आकांक्षा भास्कर

डॉ. आकांक्षा भास्कर (Dr. Akanksha Bhaskar) पेशे से डॉक्टर रह चुकी है। वहीं अब आकांक्षा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में ब्यूरोक्रेट्स हैं और एडीएम के पद पर तैनात है। वह एक IAS (आईएएस) अधिकारी होने के साथ-साथ डॉक्टर (Doctor) की भी जिम्मेदारी निभा रही है। कोरोना काल में बिगड़ते स्वास्थ्य के हालात को देखते हुए उन्होंने अस्पतालों और हेल्थ सिस्टम को इस तरीके से संभाला है कि जिले में अभी तक कोरोना से एक भी मौत नहीं हुई है।

आकांक्षा IAS अधिकारी होते हुए भी ग्रामीण इलाकों में ज़रुरतमंद लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी काम करती है। आकांक्षा के पास जो भी मरीज इलाज के लिए आते है, वह उनका पूरा सहयोग करती है। वह एक अधिकारी और एक डॉक्टर दोनों की जिम्मेदारी बखूबी निभाती है। आकांक्षा (Akanksha) जिस जिले में कार्यरत है, उस इलाके में अस्पताल में मेडिकल स्टाफ की कमी है। साथ ही आवश्यकतानुसार संसाधन भी मौजूद नहीं है। इन्हीं सभी हालातों में मद्देनजर उन्होंने पुनः स्वास्थ्य संबंधित कार्य करने का निश्चय किया है।

छुट्टियों के दिनों में भी आकांक्षा घर पर रहने के बजाय ग्रामीण इलाकों में जाकर हेल्थ सेक्टर में भी अपना योगदान देती है। वह हर संभव प्रयास करती है कि अस्पतालों में स्टाफ के साथ किसी भी चीजों कि कोई कमी न रहे। दवाइयों की सप्लाई का भी ख़ुद ही ख़्याल रखती है। कोरोना काल में डॉ. आकांक्षा भास्कर (Dr. Akanksha Bhaskar) दोहरी जिम्मेदारी निभाती नजर आईं। आकांक्षा ने सैनिटाइजेशन, हाईजीन, सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर मास्क तक की ज़रूरतों के बारे में भी लोगों में जागरुकता फैलाने तक का काम किया है। इसका असर भी हुआ कि वहां कोरोना से अबतक एक भी मौत नहीं हुई जो आश्चर्यजनक है।

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शालू सिंह

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