सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने । विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते ॥

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ,
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

तू स्वर की देवी ये संगीत तुझ से,
हर शब्द तेरा है हर गीत तुझ से,
हम है अकेले, हम है अधूरे,
तेरी शरण हम, हमें प्यार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ…

मुनियों ने समझी, गुनियों ने जानी,
वेदों की भाषा, पुराणों की बानी,
हम भी तो समझे, हम भी तो जाने,
विद्या का हमको अधिकार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ…

तू श्वेतवर्णी कमल पे विराजे,
हाथों में वीणा, मुकुट सिर पे साझे,
मन से हमारे मिटाके अंधेरे,
हमको उजालों का संसार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ…

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply