बढें निरंतर हो निर्भय,
गूँजे भारत की जय-जय ।।धृ।।

याद करें अपना गौरव
याद करें अपना वैभव
स्वर्णिम युग को प्रकटाएँगे,
मन में धारें दृढ निश्चय ।।१।।

वीरव्रती बनकर हुँकारें,
जन-जन का सामर्थ्य बढ़ाएँ ।
दशों दिशा से ज्वार उठेगा,
चीर चलेंगे घोर प्रलय ।।२।।

कर्म समर्पित हो हर प्राण,
यश अपयश पर ना हो ध्यान ।
व्यमोही आकर्षण तज दें,
आलोकित हो शील विनय ।।३।।

सृजन करें नव शुभ रचनाएँ,
सत्य अहिंसा पथ अपनाएँ ।
मंगलमय हिंदुत्व सुधा से,
छलकाएँगे घट अक्षय ।।४।।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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