आंधी चाहे तूफ़ान मिले ,

चाहे जीने व्यवधान मिले ,

बढ़ना ही अपना काम है ,

बढ़ना ही अपना काम है।

हम नई चेतना की धारा,

हम अंधियारे में उजियारा ,

हम उस ब्यार के झोंखे हैं

जो हरले सबका दुःख सारा।

बढ़ना ही अपना काम है ,

बढ़ना ही अपना काम है।

बढ़ना है शूल मिले तो क्या ?

पथ में अंगार जले तो क्या ?

जीवन में कहाँ विराम है ?

बढ़ना ही अपना काम है।

बढ़ना ही अपना काम है।

हम अनुयायी उन पांवों के ,

आदर्श लिए जो खड़े रहे ,

बाधाएं जिन्हे डिगा न सकी ,

जो संघर्ष पर अड़े रहे।

बढ़ना ही अपना काम है ,

बढ़ना ही अपना काम है।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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