भारत पुनीत भारत विशाल
उत्त्ार में हैं धवल हिमांचल निझर्र चंचल
गंगा का जल यमुना का जल
गौरी शंकर खरा धरा पर विश्व म्कुाुट धर
है चॅंवर डुलाती मेघमाल………………………………………धृदक्षिण में है भारत पदतल नील जलोत्पल
लंका का स्थल लंका का जल
शुध्द चरण तल हरता कलिमल निशिदिन पलपल
संसार झुकाता जिसे भाल ………………।।……।.१

पूवर् दिशा में ब्रह्‌मा प्रांतर कानन सुंदर
प्रात: उठकर हॅंसे दिवाकर
मित्र बंधुवर खडे ध्दार पर
उनसे मिलकर भुज बंधन भर
युग युग से जग मे है निहाल……।।…………………।२

पश्चिम में है सिंधु सुमंगल स्निग्ध सिंधु जल
करता कल कल भरता छल छल
जहॉं दिवाकर आता थक कर
जाता पीकर जल अॅंजुलि भर
हो उठता आनन लाल लाल…………………………३

मातृभूमि यह पितृभूमि यह
अमर भूमि यह समर भूमि यह
जिसका जन जन जिसका कण कण
जग को अपर्ण

दृढव्रती सदा से नौनिहाल……………………… ………..४

BArata punIta BArata viSAla
utt^^#093E;ra meM haiM dhavala himAMcala niJarra caMcala
gaMgA kA jala yamunA kA jala
gaurI SaMkara KarA dharA para viSva mku#093E;#0941;Ta dhara
hai c~eMvara DulAtI meGamAla………………………………………dhRu

dakShiNa meM hai BArata padatala nIla jalotpala
laMkA kA sthala laMkA kA jala
Sudhda caraNa tala haratA kalimala niSidina palapala
saMsAra JukAtA jise BAla ………………||……|.1

pUvar diSA meM brah^^mA prAMtara kAnana suMdara
prAta: uThakara h~eMse divAkara
mitra baMdhuvara KaDe dhdAra para
unase milakara Buja baMdhana Bara
yuga yuga se jaga me hai nihAla……||…………………|2

paScima meM hai siMdhu sumaMgala snigdha siMdhu jala
karatA kala kala BaratA Cala Cala
jah~oM divAkara AtA thaka kara
jAtA pIkara jala a#0945;Mjuli Bara
ho uThatA Anana lAla lAla…………………………3

mAtRuBUmi yaha pitRuBUmi yaha
amara BUmi yaha samara BUmi yaha
jisakA jana jana jisakA kaNa kaNa
jaga ko aparNa

dRuDhavratI sadA se naunihAla……………………… ………..4

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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