चल रहे हैं चरण अगणित ध्येय के पथ पर निरन्तर।

श्रेष्ठ जीवन की धरोहर पूर्वजों से जो मिली है
विश्व को सुख-शान्ति दात्री जो यहाँ संस्कृति पली है
है उसे रखना चिरन्तन मृत्यु का भी सिर कुचल कर
चल रहे हैं चरण अगणित ॥१॥

हूण शक बर्बर यवन की मौत इस भू पर हुई है
आंग्ल-मुगल विदेशियों की जीत हार बनी यहीं है
अन्त में विजयी हमी हैं आदि का अभिमान लेकर
चल रहे हैं चरण अगणित ॥२॥

भ्रान्ति जन-मन की मिटाते क्रांति का संगीत गाते
एक के दस लक्ष्य होकर कोटियों को हैं बुलाते
मातृ-भू की अर्चना में विजय का विश्वास रखकर
चल रहे हैं चरण अगणित ॥३॥

साध्य करना है हमें गीता प्रदर्शित ध्येय -सपना
बसी इसी की पूर्ति के हित हो समर्पित जन्म अपना
तुष्ट माँ होगी तभी तो विश्व में सम्मान पाकर
बढ़ रहे हैं चरण अगणित बस इसी धुन में निरन्तर
चल रहे हैं चरण अगणित ॥४॥

cala rahe haiṁ caraṇa agaṇita dhyeya ke patha para nirantara |

śreṣṭha jīvana kī dharohara pūrvajoṁ se jo milī hai
viśva ko sukha-śānti dātrī jo yahā saṁskṛti palī hai
hai use rakhanā cirantana mṛtyu kā bhī sira kucala kara
cala rahe haiṁ caraṇa agaṇita ||1||

hūṇa śaka barbara yavana kī mauta isa bhū para huī hai
āṁgla-mugala videśiyoṁ kī jīta hāra banī yahīṁ hai
anta meṁ vijayī hamī haiṁ ādi kā abhimāna lekara
cala rahe haiṁ caraṇa agaṇita ||2||

bhrānti jana-mana kī miṭāte krāṁti kā saṁgīta gāte
eka ke dasa lakṣya hokara koṭiyoṁ ko haiṁ bulāte
mātṛ-bhū kī arcanā meṁ vijaya kā viśvāsa rakhakara
cala rahe haiṁ caraṇa agaṇita ||3||

sādhya karanā hai hameṁ gītā pradarśita dhyeya -sapanā
basī isī kī pūrti ke hita ho samarpita janma apanā
tuṣṭa mā hogī tabhī to viśva meṁ sammāna pākara
baṛha rahe haiṁ caraṇa agaṇita basa isī dhuna meṁ nirantara
cala rahe haiṁ caraṇa agaṇita ||4||

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply