पादारविन्दभक्तलोकपालनैकलोलुपं

सदारपार्श्वमात्मजादिमोदकं सुराधिपम् ।

उदारमादिनाथभूतनाथमद्भुतात्मवैभवं

सदा रवीन्दुकुण्डलं नमामि भाग्यसम्भवम् ॥ १ ॥

कृपाकटाक्षवीक्षणं विभूतिवेत्रभूषणं

सुपावनं सनातनादिसत्यधर्मपोषणम् ।

अपारशक्तियुक्तमात्मलक्षणं सुलक्षणं

प्रभामनोहरं हरीशभाग्यसम्भवं भजे ॥ २ ॥

मृगासनं वरासनं शरासनं महौजसं

जगद्धितं समस्तभक्तचित्तरङ्गसंस्थितम् ।

नगाधिराजराजयोगपीठमध्यवर्तिनं

मृगाङ्कशेखरं हरीशभाग्यसम्भवं भजे ॥ ३ ॥

समस्तलोकचिन्तितप्रदं सदा सुखप्रदं

समुत्थितापदन्धकारकृन्तनं प्रभाकरम् ।

अमर्त्यनृत्तगीतवाद्यलालसं मदालसं

नमस्करोमि भूतनाथमादिधर्मपालकम् ॥ ४ ॥

चराचरान्तरस्थित प्रभामनोहर प्रभो

सुरासुरार्चिताङ्घ्रिपद्म भूतनायक ।

विराजमानवक्त्र भक्तमित्र वेत्रशोभित

हरीशभाग्यजात साधुपारिजात पाहि माम् ॥ ५ ॥

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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