दिव्य ध्येय की ओर तपस्वी जीवन भर अविचल चलता है ॥

सज धज कर आए आकर्षण पग पग पर झूमते प्रलोभन
हो कर सब से विमुख बटोही पथ पर संभल संभल बढता है ॥

अमर तत्व की अमिट साधना प्राणो मे उत्सर्ग कामना
जीवन का शाश्वत व्रत ले कर साधक हँस कण कण गलता है ॥

सफल विफल और आस निराशा इस की ओर कहाँ जिज्ञासा
बीहडता मे राह बनाता राही मचल मचल चलता है ॥

पतझड के झंझावातों मे जग के घातों प्रतिघातों मे
सुरभि लुटाता सुमन सिहरता निर्जनता मे भी खिलता है ॥

Transliteration:

divya dhyeya kī ora tapasvī jīvana bhara avicala calatā hai ||

saja dhaja kara āe ākarṣaṇa paga paga para jhūmate pralobhana
ho kara saba se vimukha baṭohī patha para saṁbhala saṁbhala baḍhatā hai ||

amara tatva kī amiṭa sādhanā prāṇo me utsarga kāmanā
jīvana kā śāśvata vrata le kara sādhaka hasa kaṇa kaṇa galatā hai ||

saphala viphala aura āsa nirāśā isa kī ora kahā jijñāsā
bīhaḍatā me rāha banātā rāhī macala macala calatā hai ||

patajhaḍa ke jhaṁjhāvātoṁ me jaga ke ghātoṁ pratighātoṁ me
surabhi luṭātā sumana siharatā nirjanatā me bhī khilatā hai ||

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply