गणपति स्तुतिः

गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थ जम्बूफलसार भक्षितम्
उमासुतं शोक विनाशकारणं नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम् ॥

गणपति राखो मेरी लाज

गणपति राखो मेरी लाज, गणपति राखो मेरी लाज।
पूरन कीजै मेरे काज, पूरन कीजै मेरे काज।।
गणपति राखो मेरी लाज।

तू भक्तों का प्यारा है सबका पालनहारा है।
भयहारी दुखहारी तू करता मूषक सवारी तू।।

तू ही विघ्न-विनाशक है दीनजनों का रक्षक है।

तेरा ही हम नाम जपें, तुझको हम प्रणाम करें।।

सदा रहे खुशहाल गणपति, लाल जो प्रथमें तुम्हे ध्यावे।

गौरी पुत्र प्यारे जगत से न्यारे वो तुझसे सब पावे।

तेरी दया का मैं मोहताज, तेरी दया का में मोहताज।

गणपति राखो मेरी लाज।।

हे शंभु के लाल प्रभु किरपाल में आया शरण तिहारी

हे गिरिजा के लाल प्रभु दिग्पाल तेरी है महिमा न्यारी

विनती सुनलो मेरी आज, विनती सुनलो मेरी आज।

गणपति राखो मेरी लाज।।

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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