आज के जमाने में बिजली हमारी आम ज़रूरतों में से एक बन गई है। बिना बिजली के ज़िंदगी जीने की हम कल्पना भी नहीं कर सकते है। यदि कहा जाए कि आज के आधुनिकीकरण में भी कोई बिना बिजली के शौक़ से जीवन व्यतीत कर रहा है तो शायद हमें यकीन नहीं होगा लेकिन यह सच है कि एक औरत “डॉ. हेमा साने” अपनी शौक़ से 80 वर्षों से बिना बिजली के ज़िंदगी जी रही है ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे।

पुणे के पेठ की रहने वाली 80 वर्षीय डॉ. हेमा साने (Dr. Hema Sane) बिना बिजली के जीवन जीने का निर्णय लिया है। हेमा सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में पीएचडी की है। आगे वह पुणे (Pune) में गरवारे कॉलेज की प्रोफ़ेसर रह चुकी है। उन्होंने अब तक अपने घर में बिजली का कनेक्शन नहीं लिया है। अंधेरे में ज़िंदगी जीने के साथ ही हेमा कई किताबें लिख चुकी है जिससे छात्रों का भविष्य उज्ज्वल हो रहा है।

डॉ. हेमा साने (Dr. Hema Sane) को पर्यावरण से बेहद लगाव है जिसकी सुरक्षा के लिए वह इतना कठिन जीवन व्यतीत कर रही है। हेमा के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद भी वह किसी इमारत में नहीं बल्कि पुणे के पेठ इलाके में एक झोपड़ी में रहती है। जहां बिजली, पंखा, मोबाइल, टीवी, AC… जैसी कोई सुविधाएं मौजूद नहीं है। यहां तक की हेमा कभी बाहर जाने के लिए ऑटो-टैक्सी का भी इस्तेमाल नहीं करती है।

डॉ. हेमा के अनुसार आज के आधुनिकीकरण में अपनी पसंद से वह इतनी मुश्किल ज़िंदगी जी रही है। लोग हेमा को मूर्ख और पागल बोलते है। लेकिन उनके लिए यह कोई मायने नहीं रखता। वह कभी किसी की बातें नहीं सुनतीं है, कौन क्या बोल रहा है? क्योंकि वह अपने पसंद के अनुसार ज़िंदगी जीती है। उनके अनुसार खाना, कपड़ा और मकान इंसान की बुनियादी ज़रूरतें है। पहले के लोग बिना बिजली के ही जीवन-यापन करते थे तो आज क्यों नहीं, बिजली के साथ तो लोग कुछ समय से ही जी रहे है। हेमा को कभी बिजली की ज़रूरत नहीं महसूस हुई। जो बिजली आज के पीढ़ी के लिए मूल ज़रूरत बन गई है, उसे बनाने से लेकर इस्तेमाल करने में अनेकों प्रकार की गैस का उत्सर्जन होता है जो हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करता है। इसका इस्तेमाल करके कहीं न कहीं हम पर्यावरण को नुक्सान पहुंचा रहे है।

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शालू सिंह

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