एक-एक पग बढ़ते जायें
बल वैभव का युग फिर लायें॥

जन -जन की आँखों में जल है
भारत माता आज विकल है।
आज चुनौती हम पुत्रों को
जिसमें राष्ट्र-प्रेम अविचल है।
अपना जीवन धन्य इसी में
मुरझाये मुख कमल खिलायें॥

बिखरे सुमन पड़े है अगणित
स्नेह सूत्र में कर लें गुंफित
माता के विस्मृत मन्दिर को
मधुर गंध से कर दें सुरभित।
जननी के पावन चरणों में
कोटि सुमन की माल चढ़ायें॥

कोटि जनों की संघ शक्ति हो
सब ह्नदयों में राष्ट्र-भक्ति हो
कोटि बढ़े पग एक दिशा में
सबकें मन में एक युक्ति हो
कोटि- कोटि हाथों वाली
नव असुरमर्दिनी हम प्रगटायें॥

English Transliteration:
eka-eka paga baṛhate jāyeṁ
bala vaibhava kā yuga phira lāyeṁ ||

jana -jana kī ākhoṁ meṁ jala hai
bhārata mātā āja vikala hai |
āja cunautī hama putroṁ ko
jisameṁ rāṣṭra-prema avicala hai |
apanā jīvana dhanya isī meṁ
murajhāye mukha kamala khilāyeṁ ||

bikhare sumana paṛe hai agaṇita
sneha sūtra meṁ kara leṁ guṁphita
mātā ke vismṛta mandira ko
madhura gaṁdha se kara deṁ surabhita |
jananī ke pāvana caraṇoṁ meṁ
koṭi sumana kī māla caṛhāyeṁ ||

koṭi janoṁ kī saṁgha śakti ho
saba hnadayoṁ meṁ rāṣṭra-bhakti ho
koṭi baṛhe paga eka diśā meṁ
sabakeṁ mana meṁ eka yukti ho
koṭi- koṭi hāthoṁ vālī
nava asuramardinī hama pragaṭāyeṁ ||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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