हम भारत माँ की सन्तान बढें चीरकर हर तूफान॥

शील क्षमा है बोलों में
गिनती है अनमोलों में
हम है जीवन का वरदान॥१॥

हम अनेकता में भी एक
हम संकट में ध्रुव टेक
हम आजादी की मुस्कान ॥२॥

दौर प्रगति का हम आगे
साथ समय के हम भागे
हम हैं बलिदानों की आन ॥३॥

हम हैं सुख दुःख से ऊपर
सिर पर अम्बर पग है भू पर
हम निर्झर तोडें चट्टाने॥४॥

hama bhārata mā kī santāna baḍheṁ cīrakara hara tūphāna ||

śīla kṣamā hai boloṁ meṁ
ginatī hai anamoloṁ meṁ
hama hai jīvana kā varadāna ||1||

hama anekatā meṁ bhī eka
hama saṁkaṭa meṁ dhruva ṭeka
hama ājādī kī muskāna ||2||

daura pragati kā hama āge
sātha samaya ke hama bhāge
hama haiṁ balidānoṁ kī āna ||3||

hama haiṁ sukha duaḥkha se ūpara
sira para ambara paga hai bhū para
hama nirjhara toḍeṁ caṭṭāne||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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