हम ग्रामों की ओर चलें
संघ किरण घर घर देने को अगणित नन्दा दीप जलें।
मौन तपस्वी साधक बनकर हिमगिरि सा चुपचाप गलें।

तृण कुटीर में रहने वाले
दुख अभाव मे पलने वाले ।
ईश्वर अंश जीव अविनाशी
आर्य धर्म के वे विश्वासी।
उसने सुख दुख में समरस हों संघ मंत्र के भाव पलें।

नई चेतना का स्वर देकर
जन समाज को नया मोड़ दें।
साहस शौर्य ह्रदय में भरकर
नई शक्ति का नया छोर दे।
संघ शक्ति के महाघोष से असुरों का संसार दलें।

परहित को आदर्श धारकर
परपीड़ा को ह्रदय हार दें।
निश्छल निर्मल मन से सबको
ममता का अक्षय दुलार दे।
निशा निराशा के सागर में बन आशा के कमल खिलें।

जन मन भावुक भाव भक्ति है
परम्परा का मान यहाँ।
ग्राम्य धरा की स्वर वीणा पर
गाते गौरव गान यहाँ।
त्योहारों पर लघु विराट बन नारायण साकार मिलें।

hama grāmoṁ kī ora caleṁ
saṁgha kiraṇa ghara ghara dene ko agaṇita nandā dīpa jaleṁ |
mauna tapasvī sādhaka banakara himagiri sā cupacāpa galeṁ |

tṛṇa kuṭīra meṁ rahane vāle
dukha abhāva me palane vāle |
īśvara aṁśa jīva avināśī
ārya dharma ke ve viśvāsī |
usane sukha dukha meṁ samarasa hoṁ saṁgha maṁtra ke bhāva paleṁ |

naī cetanā kā svara dekara
jana samāja ko nayā moṛa deṁ |
sāhasa śaurya hradaya meṁ bharakara
naī śakti kā nayā chora de |
saṁgha śakti ke mahāghoṣa se asuroṁ kā saṁsāra daleṁ|

parahita ko ādarśa dhārakara
parapīṛā ko hradaya hāra deṁ |
niśchala nirmala mana se sabako
mamatā kā akṣaya dulāra de |
niśā nirāśā ke sāgara meṁ bana āśā ke kamala khileṁ |

jana mana bhāvuka bhāva bhakti hai
paramparā kā māna yahā |
grāmya dharā kī svara vīṇā para
gāte gaurava gāna yahā |
tyohāroṁ para laghu virāṭa bana nārāyaṇa sākāra mileṁ |

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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