हम स्वदेश के सपूत, आज पग बढ़ा चलें ॥ध्रु॥

हाथ में अंगार है,
हर चरण पहाड़ है,
हम बढ़े जिधर उधर, आंधियाँ ही बढ़ चलें ॥१॥

मातृभूमि तू न डर
धीर धर विश्वास कर,
शत्रु शीश बीनती है, यह दुधार जब चले ॥२॥

है यहाँ कलह न द्वेष,
एक प्राण है स्वदेश,
जय हमारे हाथ में है, हम सभी विचार लें ॥३॥

हम स्वदेश के सपूत, आज पग बढ़ा चलें ॥

hama svadeśa ke sapūta āja paga baṛhā caleṁ ||dhru||

hātha meṁ aṁgāra hai
hara caraṇa pahāṛa hai
hama baṛhe jidhara udhara āṁdhiyā hī baṛha caleṁ ||1||

mātṛbhūmi tū na ḍara
dhīra dhara viśvāsa kara
śatru śīśa bīnatī hai yaha dudhāra jaba cale ||2||

hai yahā kalaha na dveṣa
eka prāṇa hai svadeśa
jaya hamāre hātha meṁ hai hama sabhī vicāra leṁ ||3||

hama svadeśa ke sapūta āja paga baṛhā caleṁ ||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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