इस जैन धरम में जिनागम,
और संतो का समागम,
हमें पल-पल पल-पल,
धर्म की याद दिलावे है,
हम भटके ना जीवन मे,
मार्ग दिखावे है,
इस जैंन धरम में जिनागम,
और संतो का समागम।।

तर्ज – तेरी आख्या का यो।

जैन धर्म में ही तो,
तत्व ज्ञान मिलता है,
कैसे रुके है हिंसा,
वो विज्ञान मिलता है,
तू जैन धर्म में आया,
शुभ कर्मों से ये पाया,
हमें पल-पल पल-पल,
धर्म की याद दिलावे है,
हम भटके ना जीवन मे,
मार्ग दिखावे है,
इस जैंन धरम में जिनागम,
और संतो का समागम।।

लेकर के मुनि दीक्षा,
जो संत बनते है,
वे ही तो आने वाले,
अरिहंत बनते है,
लेके जैनेश्वरी दीक्षा,
हमे देते धर्म की शिक्षा,
हमें पल-पल पल-पल,
धर्म की याद दिलावे है,
हम भटके ना जीवन मे,
मार्ग दिखावे है,
इस जैंन धरम में जिनागम,
और संतो का समागम।।

इस जैन धरम में जिनागम,
और संतो का समागम,
हमें पल-पल पल-पल,
धर्म की याद दिलावे है,
हम भटके ना जीवन मे,
मार्ग दिखावे है,
इस जैंन धरम में जिनागम,
और संतो का समागम।।

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply