जल उठी अखण्डित ज्योति।

क्षीण पड़ी रश्मियाँ युगों से
दमक उठी तिमिरावृत मग पर।
निविड़ निशा में सोये मानव
निकल पड़े निज पथ लख डग भर।
सोयी मानवता जागी
जग उठी शक्तियाँ सोती॥१॥

युग-युग की अलसायी पलकें
चौंक उठी ज्योति जग लख कर।
गत विस्मृत अरमान ह्रदय के
जाग उठे अंगड़ाई लेकर।
कण-कण स्पंदित हुआ आज
गुँथा गये बिखरते मोती॥२॥

गई निराशा निशा बीत अब
प्राची अरुणिम हुआ दृष्टिगत।
नव-स्पंदन नव-जीवन जग में
जीवित हुआ सुधा पीकर मृत
विस्मृत स्मृतियाँ जाग उठी
मिल गई राष्ट्र निधि खोती॥३॥

jala uṭhī akhaṇḍita jyoti |

kṣīṇa paṛī raśmiyā yugoṁ se
damaka uṭhī timirāvṛta maga para |
niviṛa niśā meṁ soye mānava
nikala paṛe nija patha lakha ḍaga bhara |
soyī mānavatā jāgī
jaga uṭhī śaktiyā sotī ||1||

yuga-yuga kī alasāyī palakeṁ
cauṁka uṭhī jyoti jaga lakha kara |
gata vismṛta aramāna hradaya ke
jāga uṭhe aṁgaṛāī lekara |
kaṇa-kaṇa spaṁdita huā āja
guthā gaye bikharate motī ||2||

gaī nirāśā niśā bīta aba
prācī aruṇima huā dṛṣṭigata |
nava-spaṁdana nava-jīvana jaga meṁ
jīvita huā sudhā pīkara mṛta
vismṛta smṛtiyā jāga uṭhī
mila gaī rāṣṭra nidhi khotī ||3||

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply