जननी जन्म-भूमि तू मेरी
प्राणों से भी प्यारी है।

रत्नाकर चरणोदक लेकर
सदा शान्ति बरसाता है।
अचल हिमालय खड़ा स्वर्ग तक
अटल भक्ति दर्शाता है।
आकर के वसन्त चरणों में
अपनी भेंट चढ़ाता है।
एक- एक रज कण भी तेरा
गौरव पाठ पढ़ाता है।
तेरी कीर्ति कथा कहने में
सदा शारदा हारी है॥जननी॥०॥

मञ्जु मलय मारुत के झोंके
स्वर्ग भूमि से आते है।
पुण्यप्रसू तेरे दर्शन का
सुख सहर्ष ले जाते हैं
प्रेमाकुल से शरद्श्याम घन
उमड़ -उमड़ कर आते है।
सुभगे तव पद कमलों में ही
शान्ति अन्त में पाते है।
अधिक कहें क्या तेरी शोभा
स्वर्गलोक से न्यारी है॥जननी॥०॥

सुरभि पूर्ण तव दिव्य तपोवन
किसका मन न चुराते हैं।
भाँति-भाँति के गान भक्तिमय
विहग वृन्द सब गाते हैं।
तब फिर नन्दन वन सजता है
और देवगण गाते हैं
जय-जय भारत-भूमि जयति जय
कह कर मोद मनाते हैं।
रीझ- रीझ कर निशानाथ ने
तव आरती उतारी है।जननी॥०॥

तेरी ही गोदी में आकर
हरि ने गीत ज्ञान कहा।
तेरी ही गोदी में माता
प्रथम सभ्यता स्रोत बहा।
तेरी ही गोदी में माता
वीर विक्रमी हुए महा।
तेरी ही गोदी में खेले
रण -बाँके रणधीर यहाँ।
मेरा रोम-रोम हे माता
तेरा ही आभारी है॥जननी।०॥

jananī janma-bhūmi tū merī
prāṇoṁ se bhī pyārī hai |

ratnākara caraṇodaka lekara
sadā śānti barasātā hai |
acala himālaya khaṛā svarga taka
aṭala bhakti darśātā hai |
ākara ke vasanta caraṇoṁ meṁ
apanī bheṁṭa caṛhātā hai |
eka- eka raja kaṇa bhī terā
gaurava pāṭha paṛhātāa hai |
terī kīrti kathā kahane meṁ
sadā śāradā hārī hai |jananī||0||

mañju malaya māruta ke jhoṁke
svarga bhūmi se āte hai |
puṇyaprasū tere darśana kā
sukha saharṣa le jāte haiṁ
premākula se śaradśyāma ghana
umaṛa -umaṛa kara āte hai |
subhage tava pada kamaloṁ meṁ hī
śānti anta meṁ pāte hai |
adhika kaheṁ kyā terī śobhā
svargaloka se nyārī hai |jananī||0 ||

surabhi pūrṇa tava divya tapovana
kisakā mana na curāte haiṁ |
bhāti-bhāti ke gāna bhaktimaya
vihaga vṛnda saba gāte haiṁ |
taba phira nandana vana sajatā hai
aura devagaṇa gāte haiṁ
jaya-jaya bhārata-bhūmi jayati jaya
kaha kara moda manāte haiṁ |
rījha- rījha kara niśānātha ne
tava āratī utārī hai jananī||0 ||

terī hī godī meṁ ākara
hari ne gīta jñāna kahā |
terī hī godī meṁ mātā
prathama sabhyatā srota bahā |
terī hī godī meṁ mātā
vīra vikramī hue mahā |
terī hī godī meṁ khele
raṇa -bāke raṇadhīra yahā |
merā roma-roma he mātā
erā hī ābhārī hai |jananī |0||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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