कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।

मुझे चाकर समझ निहार ॥

तू जिसे चाहे ऐसी नहीं मैं,
हां तेरी राधा जैसी नहीं मैं ।
फिर भी हूँ कैसी, कैसी नहीं मैं,
कृष्णा मोहे देख तो ले अक बार ॥

बूँद ही बूँद मैं प्यार की चुन कर,
प्यासी रही पर लायी हूँ गिरिधर ।
टूट ही जाए आस की गागर,
मोहना ऐसी कांकरिया नहीं मार ॥

माटी करो या स्वरण बना लो,
तन को मेरे, चरणों से लगालो ।
मुरली समझ हाथों में उठा लो,
सोचो ना कछु अब हे कृष्ण मुरार ॥

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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