हरे हरे बागों में गौरा झूले,
ठंडी हवा चले सावन की ।
कोयल बोले याद सताए,
भोले नाथ मन भावन की ।।

हाँ हाँ हरे हरे बागों में गौरा झूले,
ठंडी हवा चले सावन की ।
कोयल बोले कोयल बोले याद सताए ।।

भोले नाथ मन भावन की ।
भोले नाथ मन भावन की ।।

अरे हरे हरे बागों में गौरा झूले,
ठंडी हवा चले सावन की ।
कोयल बोले याद सताए,
भोले नाथ मन भावन की ।।

कभी तो मिलेंगे, कहीं तो मिलेंगे,
इच्छा बतानी है मन की ।
हाँ हाँ कभी तो मिलेंगे कहीं तो मिलेंगे,
इच्छा बतानी है मन की ।।

बहार बिना कोई कदर नहीं है,
खिलते हुए इस उपवन की ।
अरे खिलते हुए इस उपवन की,
हाँ खिलते हुए इस उपवन की ।।

जाने कब आवाज सुनेगे,
पायल की इस खन खन की ।
हरे हरे बागों में गौरा झूले,
ठंडी हवा चले सावन की ।।

अरे हरे हरे बागों में गौरा झूले ।
ठंडी हवा चले सावन की ।।

सारी सखियाँ गायें मल्हारी,
गुड़िया, चिड़िया आँगन की ।
सारी सखियाँ गायें मल्हारी,
गुड़िया, चिड़िया आँगन की ।।

शिव की दीवानी हो गयी स्यानी,
समय रही ना बचपन की ।
हाँ समय रही ना बचपन की,
अरे समय रही ना बचपन की ।।

52 चिट्टी लिख लिख डाली,
पुरे हप्ते बावन की ।
अरे 52 चिट्टी लिख लिख डाली,
पुरे हप्ते बावन की ।।

हरे हरे बागों में गौरा झूले ।
ठंडी हवा चले सावन की ।।

तीन लोक में चर्चा कमल सिंह,
शिव योगी की योगन की ।
तीन लोक में चर्चा कमल सिंह,
शिव योगी की योगन की ।।

रुत सावन की जब जब आये,
बढ़ी लालसा दर्शन की ।
अरे बढ़ी लालसा दर्शन की,
हाँ बढ़ी लालसा दर्शन की ।।

जय शिव जय शिव जपते जपते ।
समय बीत जाये जीवन की ।।

अरे हरे हरे बागों में गौरा झूले,
ठंडी हवा चले सावन की ।
कोयल बोले याद सताए,
भोले नाथ मन भावन की ।।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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