नमन करें इस मातृभूमि को, नमन करें आकाश को
बलिदानों की पृष्ठभूमि पर, निर्मित इस इतिहास को ॥धृ॥

इस धरती का कण-कण पावन, यह धरती अवतारों की है ।
ऋषि-मुनियों से वन्दित धरती, धरती वेद-पुराणों की है ।
मौर्यगुप्त सम्राटों की यह, विक्रम के अभियानों की है ।
महावीर गौतम की धरती, धरती चैत्य विहारों की है ।
नमन करें झेलम के तट को, हिममंडित कैलाश को ॥१॥

याद करें सन सत्तावन की, उस तलवार पुरानी को हम ।
रोटी और कमल ने लिख दी, युग की अमिट कहानी को हम ।
माय मेरा रंग दे बसंती चोला, भगतसिंह बलिदानी को हम ।
खून मुझे दो आज़ादी लो, इस सुभाष की वाणी को हम ।
गुरु गोविन्दसिंह की कलियों के उस, अजर अमर बलिदान को ॥२॥

आओ हम सब मिल-जुल कर यह, संगठना का मंत्र जगायें ।
व्यक्ति-व्यक्ति के हृदय में, राष्ट्रभक्ति के दीप जलायें ।
हिन्दू-हिन्दू सब एक संग हो, भारत माँ का मान बढायें ।
अन्नपूर्णा भारतमाता, जग के सब दुख दैन्य मिटाये ।
अर्पित कर दें मातृभूमि हित, तन मन धन और प्राण को ॥३॥

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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