जब आत्मविश्वाश प्रवल हो तो किसी की नकारत्मक प्रतिक्रियाएं, तुम्हारे अंतर्मन को पीड़ित नहीं कर सकती !

जो अपने मन पर नियंत्रण नहीं रखता ,वह स्वयं का शनै शनै शत्रु बनता जाता है।

प्रेम में कोई वियोग नहीं होता ,प्रेम ही अंतिम योग है ,अंतिम मिलन है।

सुनो कान्हा,
जिस पल कोई आस न हो,
उस पल भी तुझसे आस बाकि हो !
मुझमे तेरी एक साँस बाकि हो !

तेरी भोली सी सूरत साँवरिया..
मेरे दिल में बसी जा रही है..
अब तो पहले से भी कहीं ज़्यादा..
न जाने क्यों याद आ रही है

तुम कृष्ण जैसे हो सबके दिल को भाते हो।
मैं राधा जैसी हूं सिर्फ तुमसे दिल लगाती हूं।।

प्रीत में तेरी कान्हा मैं अब पागल सी होने लग गयीं हूँ
बंसी की धुन सुनके मधुर मैं दिन रात थिरकने लग गयीं हूँ।

पांडवो सी विवशता आएगी ..
तो हिस्से में कृष्ण भी आएंगे ||

बीता हुआ कल जीवन को समझने का अच्छा मौका है और आने वाला कल जीवन को जीने का दूसरा मौका ||

तेरे सीने से लग कर तेरी धङकन बन जाऊँ,
तेरी साँसो मेँ घुल कर खुशबू बन जाऊँ।
हो ना फासला कोई हम दोनो के दरम्याँ
मैँ… मैँ ना रहुँ कान्हा.. बस तुँ ही तुँ बन जाऊँ।

राधा की चाहत हैं कृष्ण,
उसके दिल की विरासत हैं कृष्ण,
चाहे कितना भी रास रचा ले कृष्ण
दुनिया तो फिर भी यही कहती हैं
राधे कृष्ण राधे कृष्ण।

संगीत है श्रीकृष्ण, सुर है श्रीराधे
शहद है श्रीकृष्ण, मिठास है श्रीराधे
पूर्ण है श्रीकृष्ण, परिपूर्ण है श्रीराधे
आदि है श्रीकृष्ण, अनंत है श्रीराधे

प्यार में कितनी बाधा देखि ,
फिर भी कृष्ण के साथ राधा देखि ||
जय श्री कृष्णा – राधे राधे

हे कान्हा
जी भर के तुम्हे देखूं, कुछ ऐसा नज़ारा हो,
बेताबी मेरी नज़र में हो,और चेहरा तुम्हारा हो !

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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