रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,
सुल्फा गांजा भांग धतुरा मेरे को ना भात से
रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,

देशी रोटी घर में भोले खइयो बड़े चाव से
भंगियाँ न मिलेगी भोले लस्सी मठा ठाठ से
मार पालकी बेठ के भोले जीमू बड़े ठाठ से

रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,

राह निहारु कब से भोले देखू तेरी बाट से
जिस दिन घर आवो गे भोले बन जावे की बात से
आगड़ पड़ोसी तब देखे गे रिश्ता तुझसे खास है
रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,

उड़ चटकनी से रोटी भोले लागे धनी प्यारी से
देखोगे अगर जाके भोले अब के बारी मेरी से
रणजीत की तुम सुन ले भोले वो तो पालनहार से
रुखी सुखी रोटी भोले खाइयो मेरे हाथ से,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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