सरस्वती स्तोत्रम् || Saraswati Stotram || Saraswati Stotra
सरस्वतीं नमस्यामि चेतनानां हृदिस्थितां ।

कण्ठस्थां पद्मयोनेस्तु हिमाकरप्रियास्पदाम् ॥ १ ॥

मतिदां वरदां शुद्धां वीणाहस्तवरप्रदां ।

ऐं ऐं मन्त्रप्रियां ह्रीं ह्रां कुमतिध्वंसकारिणीम् ॥ २ ॥

सुप्रकाशां निरालम्बां अज्ञानतिमिरापहाम् ।

शुक्लां मोक्षप्रदां रम्यां शुभाङ्गां शोभनप्रदाम् ॥ ३ ॥

पद्मोपविष्टां कुण्डलिनीं शुक्लवर्णां मनोरमाम् ।

आदित्यमण्डले लीनां प्रणमामि हरिप्रियाम् ॥ ४ ॥

इति मासं स्तुतानेन वागीशेन महात्मना ।

आत्मानं दर्शयामास शरदिन्दुसमप्रभाम् ॥ ५ ॥

सरस्वत्युवाच वरं वृणीष्व भद्रं ते यत्ते मनसि वर्तते ।

ब्रुहस्पतिः वरदा यदि मे देवि सम्यग्ज्ञानं प्रयच्छ मे ॥ ६ ॥

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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