श्री वामन स्तोत्रम् || Sri Vamana Stotra
अदितिरुवाच ।

यज्ञेश यज्ञपुरुषाच्युत तीर्थपाद

तीर्थश्रवश्श्रवण मङ्गलनामधेय ।

आपन्नलोकवृजिनोपशमोदाऽऽद्य शं नः

कृधीश भगवन्नसि दीननाथः ॥ १ ॥

विश्वाय विश्वभवनस्थिति सम्यमाय

स्वैरं गृहीतपुरुशक्तिगुणाय भूम्ने ।

स्वस्थाय शश्वदुपबृंहितवूर्णबोध-

व्यापादितात्मतमसे हरये नमस्ते ॥ २ ॥

आयुः परं वपुरभीष्टमतुल्यलक्ष्मी-

र्द्यौभूरसास्सकलयोगगुणास्त्रिवर्गः ।

ज्ञानं च केवलमनन्त भवन्ति तुष्टा-

त्त्वत्तो नृणां किमु सपत्नजयादिराशीः ॥ ३ ॥

|| इति श्रीमद्भागवते श्रीवामन स्तोत्रं ||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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