विश्वंभरी अखिल विश्व की हो जनेता,
विद्या सहित वदनमें वसना विधाता,
दुर्बुद्धि को दूर हटा सदबुद्धि देना ,
विश्वंभरी माता तुम ही भव दुख हरना।

भूला पड़ा हूँ भटकता फिरता हूँ माता ,
ना सूझता पथ कोई कैसे निकलना ,
मन में भयंकर तूफान हे उठते बचाना ,
विश्वंभरी माता तुम ही भव दुख हरना।

इस रंकको उबरने नहीं कोई रास्ता
जनमांद हूँ जननी बस तुजसे ही वास्ता
सुनकर विलाप शिशु को अपने दिल बिठाना
विश्वंभरी माता तुम ही भव दुख हरना।।

vishvambharee akhil vishv kee ho janeta, 
vidya sahit vadanamen vasana  vidhaata,
durbuddhi ko door hata sadabuddhi dena , 
vishvambharee maata tum hee bhav dukh harana. 

bhoola pada hoon  bhatakata phirata hoon maata ,
na soojhata path koee kaise  nikalana ,
man mein bhayankar toophaan he uthate bachaana ,
vishvambharee maata tum hee bhav dukh harana.
is rankako ubarane nahin koee raasta
janamaand hoon jananee bas tujase hee vaasta
sunakar vilaap shishu ko apane dil bithaana
vishvambharee maata tum hee bhav dukh harana..

 

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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