यह है अपनी भारत माता
सिर पर जिसके मुकुट हिमालय।
चरणों में सागर लहराता
यही अपनी भारत माता॥ध्रु०॥

जिसकी साड़ी है हरियाली
भाँति भाँति के फूलों वाली
जिसके ऊपर नील पटल पर
फहर-फहर भगवा फहराता॥१॥

जो माता-सी दूध पिलाती
अन्न और फल फूल खिलाती।
श्वास-श्वास में मारुती जिसका
हमको नव जीवन दे जाता॥२॥

इसका हम सम्मान करेंगे
माता जैसा ध्यान करेंगे
जननी से भी बढ़ कर इसका
है हम सबका प्यारा नाता॥३॥

yaha hai apanī bhārata mātā
sira para jisake mukuṭa himālaya|
caraṇoṁ meṁ sāgara laharātā
yahī apanī bhārata mātā ||dhru0||

jisakī sāṛī hai hariyālī
bhāti bhāti ke phūloṁ vālī
jisake ūpara nīla paṭala para
phahara-phahara bhagavā phaharātā ||1||

jo mātā-sī dūdha pilātī
anna aura phala phūla khilātī |
śvāsa-śvāsa meṁ mārutī jisakā
hamako nava jīvana de jātā ||2||

isakā hama sammāna kareṁge
mātā jaisā dhyāna kareṁge
jananī se bhī baṛha kara isakā
hai hama sabakā pyārā nātā ||3||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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