डमरू बजा के भंगियाँ चडा के देदो गोला रे
नाचे नील कंठ मंदिर पे शंकर भोला रे
सिर की जटाए सब खुल गई शिव ने लगाये जब ठुमके,
नीचे गिरी न गंग मैया सिर पे वो बैठी रही जम के
डमरू की डम डम बोले रे बम बम काटे रोला रे
नाचे नील कंठ मंदिर पे शंकर भोला रे
शिव के गले में पड़ा विष हर मारे रे
मारे रे रह रह के पुश्कारे ,
पूछवा हिला के नन्द बाबा भोले बम बम के जयकारे
धरती भी झूमी अम्बर भी झुमा हर कोई डोला रे
नाचे नील कंठ मंदिर पे शंकर भोला रे
राज अनाडी संग नाचे मिल के कवडिया सारे
अर्जी लगाने सब पौंचे भोले बाबा जी के द्वारे
हम सब गाये सब को सुनाये भजन अनमोला रे
नाचे नील कंठ मंदिर पे शंकर भोला रे

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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