योग सही तरह से जीने का विज्ञान है और इस लिए इसे दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह हमारे जीवन से जुड़े भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक, आदि सभी पहलुओं पर काम करता है। योग का अर्थ एकता या बांधना है। इस शब्द की जड़ है संस्कृत शब्द युज, जिसका मतलब है जुड़ना। आध्यात्मिक स्तर पर इस जुड़ने का अर्थ है सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना का एक होना। व्यावहारिक स्तर पर, योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने और तालमेल बनाने का एक साधन है। यह योग या एकता आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बँध, षट्कर्म और ध्यान के अभ्यास के माध्यम से प्राप्त होती है। तो योग जीने का एक तरीका भी है और अपने आप में परम उद्देश्य भी।

  1. बढ़ती उम्र का असर कम : कुछ लोगों के चेहरे पर समय से पहले ही बढ़ती उम्र का असर नजर आने लगता है। वहीं, अगर आप योग करते हैं, तो समय पूर्व चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियों को कम किया जा सकता है। योग के जरिए शरीर में जमा विषैले पदार्थ व जीवाणु साफ हो जाते हैं और फ्री रेडिकल्स का भी सफाया हो जाता है। तनाव के कारण भी समय से पहले बुढ़ापे का असर नजर आने लगता है, लेकिन योग इस अवस्था से भी बचा सकता है।
  2. शारीरिक क्षमता का बढ़ना : गलत तरीके से उठने-बैठने और चलने-फिरने से शरीर की मुद्रा बिगड़ जाती है। इस वजह से शरीर में जगह-जगह दर्द, मांसपेशियों में विकार और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इन समस्याओं से बचने का सही तरीका योग है। नियमित रूप से योग करने से हड्डियां व मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर का आकार बेहतर होता है और शारीरिक क्षमता बेहतर होती है।
  3. संतुलित वजन : इन दिनों हर कोई मोटापे का शिकार है। इसका कारण गलत खानपान और दिनचर्या है। सबसे पहले हमारा पेट खराब होता है। पाचन तंत्र बेहतर न होना ही हर बीमारी की जड़ है। इससे निपटने का आसान और बेहतरीन तरीका योग ही है। अगर आप नियमित योग करते हैं, तो कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएं दूर होती हैं और पाचन तंत्र बेहतर होता है। इससे धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है।
  4. सुडौल शरीर : योगासन सिर से लेकर पांव तक शरीर को संतुलित बनाता है और मानसिक व आत्मिक रूप से भी आपको मजबूत बनाता है। इन सभी के बेहतर प्रकार से कार्य करने पर ही शरीर सुडौल बनता है।
  5. कोर की क्षमता का बढ़ना : कोर का मुख्य रूप से अर्थ शरीर की महत्वपूर्ण मांसपेशियों के समूह को कहा जाता है। शरीर के ठीक प्रकार से काम करने के लिए कोर का मजबूत रहना जरूरी है। शरीर का पूरा भार कोर पर ही टिका होता है। ये आपको चोट लगने से बचाती हैं। योग करने से कोर में मजबूत आती हैं, लचीलापन आता है और स्वास्थ रहती हैं।
  6. मांसपेशियों में सुधार : योग करने से मांसपेशियों की गतिविधि में सुधार होता है। यह मजबूत होती हैं और इनमें लचीलापन आता है।
  7. सहनशीलता में वृद्धि : जैसा कि इस लेख में कई बार लिखा गया है कि योग सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनाता है। इसकी जरूरत रोजमर्रा के काम में पड़ती है। खासतौर पर खिलाड़ियों के लिए मानसिक तौर पर मजबूत होना जरूरी है। वह जितना सहनशील रहते हैं, उतना ही उनके प्रदर्शन में सुधार नजर आता है। साथ ही हर व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में सही निर्णय लेने में सक्षम हो पाता है।

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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