Agastya Sanhita (Hindi): By Mahaveer Prasad Mishra In Hindi PDF Free Download || अगस्त्य संहिता (हिंदी): महावीर प्रसाद मिश्रा द्वारा हिंदी में पीडीएफ मुफ्त डाउनलोड

एक बार महातेजस्वी और महातपस्वी ब्रह्मर्षि अगस्त्य जी श्री सुतीक्ष्ण मुनि के आश्रम में पधारे। सूतीक्ष्ण मूनि ने उनका यथोचित आदर सत्कार करके संसार से मुक्ति पाने का मार्ग जानने की याचना की।

महाप्रतापी अगस्त्य जी ऐसे सिद्ध महात्मा थे कि देवताओं के आग्रह से उन्होंने समुद्र को आचमन करके सोख लिया था। जिस समय राजा नहुष इन्द्र हो गये तब वह ऋषियों द्वारा उठायी हुई पालकी में बैठकर निकले थे, उन ऋषियों में अगस्त्य जो भी पालकी उठाये हुए थे। अचानक राजा नहुष का पैर महर्षि अगस्त्य जो के शरीर से छ गया, उसी अपराध पर महर्षि ने नहुष को सर्प बना दिया था।

Once Mahatejsvi and Mahatpasvi Brahmarshi Agastya Ji visited the ashram of Sri Sutixna Muni. Sotikshun Muni, by treating them with proper respect, requested to know the way to get rid of the world.

The glorious Agastya ji was such a perfect Mahatma that he had absorbed the sea by the insistence of the gods. At the time when King Nahusha became Indra, he came out of the palanquin taken by the sages, Agastya among those sages who were carrying the palanquin. Suddenly King Nahusha’s leg was touched by Maharishi Agastya Joe’s body, on the same offense, Maharishi had made Nahusha a snake.

 

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