भारत म्हारो देश पुठरो वेश, कि धन धन भारती
बोलो जय-जयकार, उतारो आरती, (ओ उतारो आरती)-2 ॥धृ॥

सोनो उगले धरती अम्बर, मोतीड़ा बरसावे रे
मुळकै सूरज चाँद गीत, कोयलड़ी मीठा गावे रे
हिमगिरि योगी राज शीश पर, ताज की गंगा वारती
समदरिया री लहरां, चरण पखारती (ओ उतारो आरती)-२ ॥१॥

कुण भूललो राणा नै, चेतक नै हल्दीघाटी नै
वीर शिवा-सो सूर कठै, दुनिया पूजै इण माटी नै
रणचंडी रो मोड़ दुर्ग, चित्तोड़ कि मौत भी हारती
जौहर री लपटां नै, रोज निहारती (ओ उतारो आरती)-२ ॥२॥

तिलक गोखले भगत बोस, बापू झाँसी री महाराणी
जौहर देख जवानां रो, तू बता कठै इतरो पाणी
गीता रो उपदेश, कर्म संदेश कृष्ण-सा सारथी
आज भरत री धरा विश्व ललकारती (ओ उतारो आरती)-२ ॥३॥

केशव माधव रो संघनाद, जण-जण रो हियो गूँजावे रे
आत्मत्याग और देशप्रेम रो, सबने पाठ पढावे रे
भगवे ध्वज री आण, देश री शाण सदा सिंगारती
संगठना री शक्ति देश संवारती (ओ उतारो आरती)-२ ॥४॥

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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