भगतो पे जब जब विपदा आई
कौन बना रखवाला मेरा डमरू वाला
कदम कदम पर दुःख संकट पे बिगड़ी बनाने वाला
मेरा डमरू वाला

माथे पे चंदा सोहे और जटा में गंगा साजे
नंदी की सवारी प्यारी गिरजा संग आप विराजे
अद्भुत रूप बना कर बेठा लगता भोला भाला
मेरा डमरू वाला

सारा सुख छोड़ के उसने श्मशानो में डेरा डाला,
रेहते ये ध्यान लगाये जपते है राम की माला
सुन के करुण पुकार हमारी दोड के आने वाला
मेरा डमरू वाला

सागर मंथन के कारण विष निकला था अति भारी,
तब विनती की देवो ने प्रभु रक्षा करो हमारी
विष पी कर जो अमृत बांटे ऐसा देव निराला
मेरा डमरू वाला

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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